History Of India In Hindi For General Knowledge

Let’s read interesting about history of india in hindi

भारत को वर्तमान समय में भारत, इंडिया एवं हिंदुस्तान नाम से संबोधित किया जाता है।   

प्राचीन काल में भारत को भारतवर्षजम्बूद्वीप, भारतखण्ड, आर्यावर्त, हिन्द आदि अन्य नामों से भी संबोधित किया जाता रहा है। 

भारतवर्ष नाम ऋषभदेव के पुत्र भरत के नाम पर पड़ा है।

भारतवर्ष जो वर्तमान समय में भारत नाम से संबोधित किया जाता है।

भारत का अंग्रेजी नाम ‘इण्डिया’ (India) की उत्पत्ति सिंधु शब्द से हुई है।

इंडिया नाम पुरानी अंग्रेजी   में ९वीं शती में और आधुनिक अंग्रेजी में १७वीं शती से मिलता है।

भारत की संस्कृति, भाषा, वस्त्र, कला और  सभ्‍यता  प्रचलित और  प्राचीन है। भारत की प्राचीन सभ्‍यता के बारे में    विस्तृत रूप से नीचे वर्णन किया गया है।

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सिंधु घाटी की सभ्‍यता

भारत का इतिहास सिंधु घाटी की सभ्‍यता के जन्‍म के साथ आरंभ हुआ है। और अधिक बारीकी से कहा जाए तो हड़प्‍पा सभ्‍यता के समय इसकी शुरुआत हुई। यह सभ्‍यता दक्षिण एशिया के पश्चिमी भाग में लगभग 2500 बीसी में विकसित हुई, जो कि वर्तमान में पाकिस्तान तथा पश्चिमी भारत के नाम से जाना जाता है। सिंधु घाटी मिश्र, मेसोपोटामिया, भारत और चीन की चार प्राचीन शहरी सबसे बड़ी सभ्‍यताओं में से अधिक विकसित थी। 1920 में, भारतीय पुरातत्त्व विभाग द्वारा किये गए सिंधु घाटी के उत्खनन से प्राप्त अवशेषों से हड़प्पा तथा मोहनजोदडो जैसे दो प्राचीन नगरों की खोज हुई। भारतीय पुरातत्त्व विभाग के तत्कालीन डायरेक्टर जनरल जॉन मार्शल ने सन 1924 में सिंधु घाटी में एक नई सभ्यता की खोज की जानकारी दी।

– भवनों के टूटे हुए हिस्‍से और अन्‍य वस्‍तुएं जैसे कि घरेलू सामान,

– युद्ध के हथियार,

– सोने और चांदी के आभूषण, मुहर,

खिलौने, बर्तन आदि दर्शाते हैं कि इस क्षेत्र में लगभग पांच हजार साल पहले एक प्राचीन अत्‍यंत विकसित सभ्‍यता थी।                                                                     

सिंधु घाटी की सभ्‍यता मूलत: एक प्राचीन शहरी सभ्‍यता थी और यहां रहने वाले लोग एक सुयोजनाबद्ध और सुनिर्मित कस्‍बों में रहा करते थे। जो व्‍यापार के केन्‍द्र भी थे।

मोहन जोदाड़ो और हड़प्‍पा के टूटे फूटे मकान या उजड़ी हुई बस्ती का बचा हुआ अंश दर्शाते हैं कि ये भव्‍य व्‍यापारिक शहर की रचना वैज्ञानिक दृष्टि से की गयी थी और इनकी देखभाल अच्‍छी तरह से की जाती थी।

यहां चौड़ी सड़कें और एक सुविकसित निकास प्रणाली की व्यवस्था थी।

घर पकाई गई ईंटों से बने होते थे और इनमें दो या दो से अधिक मंजिलें भी होती थी।       

वैदिक सभ्‍यता

वैदिक काल प्राचीन भारतीय संस्कृति का एक प्राचीन खंड है। उस दौरान वेदों की रचना हुई थी।

हड़प्पा संस्कृति के अंत के बाद भारत में एक नई सभ्यता का उदय हुआ। इस सभ्यता की जानकारी के स्रोत वेदों के आधार पर थे।

अतः इसे वैदिक सभ्यता का नाम दिया गया।

प्राचीन भारत के इतिहास में वैदिक सभ्‍यता सबसे प्रारंभिक सभ्‍यता है।

इसका नामकरण हिन्‍दुओं के प्रारम्भिक साहित्‍य वेदों के नाम पर किया गया है।

वैदिक सभ्‍यता सरस्‍वती नदी के किनारे के क्षेत्र जिसमें आधुनिक भारत के पंजाब और हरियाणा राज्‍य आते हैं, में विकसित हुई।

वैदिक हिन्‍दुओं का पर्यायवाची है, यह वेदों से निकले धार्मिक और आध्‍यात्मिक विचारों का दूसरा नाम है।

बौद्ध युग

भगवान गौतम बुद्ध के जीवनकाल में, ईसा पूर्व 7 वीं और शुरूआती 6 वीं शताब्दि के दौरान सोलह बड़ी शक्तियां (महाजनपद) विद्यमान थे।

अति महत्‍वपूर्ण गणराज्‍यों में कपिलवस्‍तु के शाक्‍य और वैशाली के लिच्‍छवी गणराज्‍य थे। गणराज्‍यों के अलावा राजतंत्रीय राज्‍य भी थे।

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बुद्ध का जन्म ईसा पूर्व 560 में हुआ और उनका अवसान ईसा पूर्व 480 में 80 वर्ष की आयु में हुआ। उनका जन्म  नेपाल में हिमालय पर्वत श्रंखला के पलपा गिरि की तलहटी में निवास कपिलवस्‍तु नगर का लुम्बिनी नामक गाँव में हुआ था। उनका वास्‍‍तविक नाम सिद्धार्थ गौतम था, उन्होंने बुद्ध धर्म की स्‍थापना की जो पूर्वी एशिया के अधिकांश हिस्‍सों में  एक महान संस्‍कृति के रूप में वि‍कसित हुआ

सिकन्‍दर का आक्रमण

ईसा पूर्व 326 में सिकंदर सिंधु नदी को पार करके तक्षशिला की ओर बढ़ा और भारत पर आक्रमण किया।

उसने झेलम और चिनाब नदियों के मध्‍य अवस्थति राज्य के राजा पौरस को युद्ध के लिए ललकारा।

परन्यतु भयंकर युद्ध के बाद भारतीय हार गए।

सिकंदर ने पौरस को गिरफ्तार कर लिया। जैसे उसने अन्य स्‍थानीय राजाओं को पराजित किया था।

अतः उसे अपने क्षेत्र में शासन करने की अनुमति दे दी।

सिकंदर की विश्व विजय की महत्वाकांक्षा ने उसे भारत विजय के लिए प्रेरित किया। इस प्रेरणा अथवा सिकंदर के भारत अभियान ने प्राचीन यूरोप को, प्राचीन भारत के निकट संपर्क मेँ आने का अवसर प्रदान किया। सिकंदर के इस भारत अभियान का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम था – भारत और यूनान के बीच विभिन्न क्षेत्रों मेँ प्रत्यक्ष संपर्क की स्थापना।

गुप्‍त साम्राज्‍य

चौथी शताब्दी में उत्तर भारत में एक नए गुप्त राजवंशो का आगमन हुआ. इस वंश का नाम गुप्तवंश था।

इस वंश ने लगभग 300 वर्ष तक राज किया। इस वंश के शासनकाल में अनेक क्षेत्रों को विकसित किया गया।

गुप्त वंश के संस्थापक श्रीगुप्त थे।

गुप्त वंशावली में श्रीगुप्त, घटोत्कच, चन्द्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त, रामगुप्त, चन्द्रगुप्त द्वितीय, स्कन्दगुप्त जैसे शासक हुए।

गुप्तवंश के तीन प्रमुख शासक थे – चन्द्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त और चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य).

कुशाणों के बाद गुप्‍त साम्राज्‍य अति महत्‍वपूर्ण साम्राज्‍य था। गुप्‍त अवधि को भारतीय इतिहास का स्‍वर्णिम युग कहा जाता है। गुप्‍त साम्राज्‍य का प‍हला प्रसिद्ध सम्राट घटोत्‍कच का पुत्र चन्‍द्रगुप्‍त था। उसने कुमार देवी से विवा‍ह किया जो कि लिच्छिवियों के प्रमुख की पुत्री थी। चन्‍द्रगुप्‍त के जीवन में यह विवाह परिवर्तन लाने वाला था। उसे लिच्छिवियों से पाटलीपुत्र दहेज में प्राप्‍त हुआ। पाटलीपुत्र से उसने अपने साम्राज्‍य की आधार शिला रखी व लिच्छिवियों की मदद से बहुत से पड़ोसी राज्‍यों को जीतना शुरू कर दिया। उसने मगध (बिहार), प्रयाग व साकेत (पूर्वी उत्‍तर प्रदेश) पर शासन किया। उसका साम्राज्‍य गंगा नदी से इलाहाबाद तक फैला हुआ था। चन्‍द्रगुप्‍त को महाराजाधिराज की उपाधि से विभूषित किया गया था और उसने लगभग पन्‍द्रह वर्ष तक शासन किया।

हर्षवर्धन

7वीं सदी के शुरुआत में, हर्षवर्धन (606-647 इसवी में) ने अपने भाई राज्‍यवर्धन की मृत्‍यु हो जाने के बाद थानेश्‍वर और कन्‍नौज की राजगद्दी संभाली। 612 इसवी तक संपूर्ण उत्तर भारत में अपना साम्राज्‍य सुरक्षित कर लिया था।

हर्षवर्धन ’भारतवर्ष’ में हिंदू सम्राट था। जिसने उत्तरी भारत में अपना एक मजबूत साम्राज्य स्थापित कर लिया था। पंजाब को छोड़कर पुरे उत्तर भारत पर शासन किया। शशांक की मृत्यु के बाद वह बंगाल को भी जीतने में सफल हुआ। हर्षवर्धन के शासनकाल का इतिहास मगध से प्राप्त दो ताम्रपत्रों, राजतरंगिणी, और हर्ष एवं बाभभट्ट रचित संस्कृत काव्य ग्रंथों में उल्लेखित किया गया है।

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